पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण, दशों दिशा में , राज तेरो
राजा और महाराजा तेरे-2… आगे है लाचार
चाकर राखले………………………….।।1।।
तीन लोक, चौदह भूवनां में, फैल्यो कारोबार तेरो
युगां युगां सूं सरपट दौड़े, श्याम तेरी सरकार
चाकर राखले………………………।।2।।
सीधो सादो, बन्दो मैं तो, नेम धेम को पक्को रे
ऐसे चाकर की तो होसी, श्याम तनै दरकार
चाकर राखले………………।।3।।
जो सौंपेगो काम साँवरा, चाव लगा कर करस्यूँ रे
अरजी है साँवरिया म्हानै, मौको दे एक बार
चाकर राखले……………..।।4।।
जो देवागो, पूण पावलो, हँसी खुशी सै लेस्यूँ रे
‘नन्दू’ थारी रजा में राजी, सेवकियो तैयार
चाकर राखले………………।।5।।
।। श्री श्याम आशीर्वाद ।। ।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम ही जीवन प्राण ।। ।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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