कैसा जादू साँवरिया है तेरे प्यार में दीवाने होकर नाचे तेरे दरबार में (Kaisa Jadu Hai Sanwariya Tere Payar Me Dewane Hokar Naache Tere Darbar Me)

Kaisa Jadu Hai Sanwariya Tere Payar Me Dewane Hokar Naache Tere Darbar Me
कैसा जादू साँवरिया है तेरे प्यार में दीवाने होकर नाचे तेरे दरबार में

 

तर्ज – तुम झोली भरलो भक्तों

 

दोहा- दिल दिया तुझे साँवरे, तुझ पर हूँ कुर्बान । 
तू ही मेरा मीत है, तूँ ही मेरी शान ।। 

 

कैसा जादू साँवरिया है तेरे प्यार में 
दीवाने होकर नाचे तेरे दरबार में ।। टेर ।। 

 

तेरी भोली-भोली सूरत, मन में प्रीत जगावे 
आते ही दरबार में तेरे, सब दुःखड़े मिट जावे 
भाता न फिर तो कोई, दूजा संसार में ।। û ।। 

 

कजरारे ये नैन तुम्हारे, दिल पे तीर चलाये 
जिस पर ये मुस्कान तुम्हारी, घायल ही कर जाये 
सुध – बुध बिसराये अपनी, तेरे दीदार में ।। ü ।। 

 

अपने भक्तों पर तूँ कान्हा, इतना प्यार लुटाये 
भूलके सारी दुनियादारी, हम तेरे हो जायें 
‘सोनू’ बंध जाते तेरे, प्रेम के तार में ।। ý ।।

 

।। श्री श्याम आशीर्वाद ।।
।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम ही जीवन प्राण ।।
।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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