भगतां की भीड़ अपार बाबा जी थारे कीर्तन मं (Bhagta Ki Bheed Apaar Babaji Thaare Kirtan Me)

Bhagta Ki Bheed Apaar Babaji Thaare Kirtan Me
भगतां की भीड़ अपार बाबा जी थारे कीर्तन मं

 

तर्ज – होलिया में उड़े रे गुलाल

 

|| दोहा ||
ज्योत जगी श्री श्याम की, लगा श्याम दरबार ।
जयकाराें की गूँज है, भजनों की बोछार ।।

 

भगतां की भीड़ अपार, बाबा जी थारे कीर्तन मं
छाई है अजब बहार, बाबा जी थारे कीर्तन मं ।। टेर ।।

 

रंग बिरंगा फूलड़ा ल्याया
सोणा – सोणा हार बनाया
खूब सजाया सिणगार, बाबा जी थारे कीर्तन मं ।। ü ।।

 

सगला मिलकर भजन सुणावे
खुद भी नाचे सबने नचावे
ताली बजावे नर-नार, बाबा जी थारे कीर्तन मं ।। ü ।।

 

जो भी थारे कीर्तन मं आवे
वो ही मुरांदा मन की पावे
म्हे भी देख्या चमत्कार, बाबा जी थारे कीर्तन मं ।। ý ।।

 

घड़ी-घड़ी म्हान परचा मिले है 
‘रवि’ कहे म्हारो जीवन खिले है 
सुपना होवे साकार, बाबा जी थारे कीर्तन मं ।। þ ।।

 

।। श्री श्याम आशीर्वाद ।।
।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम ही जीवन प्राण ।।
।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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