दर दर की ठोकर खाई फिरता था मारा मारा (Dar Dar Ki Thokar Khaai Firta Tha Maara Maara)

Dar Dar Ki Thokar Khaai Firta Tha Maara Maara
दर दर की ठोकर खाई फिरता था मारा मारा

 

तर्ज – तुझे सूरज कहूं या चंदा

 

दर दर की , ठोकर खाई, फिरता था , मारा मारा
 जब द्वार , तुम्हारे आया , तुमने ही , दिया सहारा।। ….2
जय श्री श्याम , जय , जय श्री श्याम…-2

 

खाटू , आने से , पहले , जीवन था , घोर अँधेरा
तेरी ही , दया से , बाबा, आया ह , नया सवेरा
कैसे भूलूंगा , बाबा,  मैं ये , उपकार तुम्हारा
जब द्वार , तुम्हारे आया , तुमने ही , दिया सहारा
दर दर की ठोकर खाई, फिरता था मारा मारा
जब द्वार तुम्हारे आया , तुमने ही दिया सहारा.
जय श्री श्याम , जय श्री श्याम

 

जब तक  , ये साँस ह , बाकी, मैं तेरा , नाम जपुंगा
सुख देगा , या दुःख , देगा , मैं सब , स्वीकार करूँगा
मैं तेरी , रजा में , राजी , कर लूंगा , श्याम गुजारा
जब द्वार तुम्हारे आया , तुमने ही दिया सहारा
दर दर की ठोकर खाई, फिरता था मारा मारा
जब द्वार तुम्हारे आया , तुमने ही दिया सहारा ….2
जय श्री श्याम , जय श्री श्याम

 

नरसी की , तमन्ना , ये ही ,जब इस , दुनिया से , जाऊ
उस , दुनिया में , जाकर भी , तेरा ही,  मैं , गुन गाऊ
खाटू में , पैदा , करना , जब लेउ , जन्म दोबारा
जब द्वार तुम्हारे आया , तुमने ही दिया सहारा
दर दर की ठोकर खाई, फिरता था मारा मारा
जब द्वार तुम्हारे आया , तुमने ही दिया सहारा ….2
जय श्री श्याम , जय श्री श्याम

 

।। श्री श्याम आशीर्वाद ।।
।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम यही जीवन प्राण ।।
।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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