Skip to content
Main Gunahgar Hu Mujhko Bhi Nibhana Hoga Meri Fariyad Ko Prabhu Dhyan Me Lana Hoga
मैं गुनाहगार हूँ मुझको भी निभाना होगा मेरी फरियाद को प्रभु ध्यान में लाना होगा
तर्ज – इस भरी दुनिया में कोई
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी निभाना होगा,
मेरी फरियाद को प्रभु, ध्यान में लाना होगा ।।
माफ जब लाखों ही, अधर्मों को किया है तूने,
मेरी नैया को भी, उस पार लगाना होगा ।।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी ….
किस तरह भूल गये, इसकी तलबदारी को,
तुम अगर रूठे तो, फिर कौन ठिकाना होगा ।।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी ….
नाम हर लब पे है, आलम में दयालु तेरा,
मान भी जाओ प्रभो, कितना मनाना होगा ।।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी ….
तेरे जज्बातों पे दिल, दिल से फिदा है मेरा,
हँसके फिर एक दफा, नैन मिलाना होगा ।।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी ….
ग़म की आँधी जो चली, घोर अँधेरा छाया,
दिल के तहखाने में फिर, दीप जलाना होगा ।।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी ….
तेरी उल्फ़त का जाम, श्यामबहादुर ने पिया,
तेरे सौदाई को ‘शिव’, दीद दिखाना होगा ।।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझको भी ….
स्व. शिवचरण जी भीमराजका ‘शिव’ द्वारा ‘इस भरी दुनिया में, कोई भी हमारा ना हुआ’ गीत की तर्ज़ पर रचित अदभुत रचना ।