इक रात दुखी मैं होके सो गया था रोते रोते (Ek Raat Dukhi Main Hoke So Gya Tha Rote Rote)

Ek Raat Dukhi Main Hoke So Gya Tha Rote Rote
इक रात दुखी मैं होके सो गया था रोते रोते

 

तर्ज – सूरज कब दूर गगन से

 

इक रात , दुखी मैं , होके … सो , गया था , रोते रोते
सपने में , श्याम ने , आकर … कहा , मुझको , गले लगाकर
मैं हु ना , क्यू चिंता , करता है … मेरे होते , क्यू , डरता है।।

 

श्याम धणी , को देखा … धीरज , मैने खोया …-2
लिपट गया , चरणों से …. फुट फुट , कर रोया
उसका कर , होले होले … मेरे , आंसू पोंछे , बोले …-2
मैं हु ना , क्यू चिंता , करता है … मेरे होते , क्यू , डरता है।।

 

श्याम कहे , इक बर , जो … मेरी , शरण मे , आया …-2
हार , नही वो , सकता … तू , काहे घबराया
जिसको मैंने , अपनाया … उस पर है , मेरी छाया …-2
मैं हु ना , क्यू चिंता , करता है … मेरे होते , क्यू , डरता है।।

 

श्याम की बाते , सुनकर … भूल गया , गम सारे
ऐसा लगा , कि मेरा … फिर से , जन्म हुआ रे
किया श्याम , की और इसारा … सोनू दिल , से ये पुकारा
तू है ना , फिकर मुझ को , क्या है …. तेरे होते  , डर क्या है

 

।। श्री श्याम आशीर्वाद ।।
।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम ही जीवन प्राण ।।
।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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