Jabse Liya Sahara Tere Is-Dawar Ka Sukh Phika Lagta Hai Sansar Ka
जबसे है लिया सहारा तेरे इस द्वार का सुख फीका लगता है झूठे संसार का
तर्ज – अफसाना लिख रही हूँ
जबसे है लिया सहारा, तेरे इस द्वार का,
सुख फीका-फीका लगता है, झूठे संसार का ।।
हर चीज में मुझको दी, बड़ी बरकतें तुमने,
बख्शी जमाने भर की, मुझे नेमतें तुमने,
लेकिन दिल तो भूखा है, बस तेरे प्यार का ।
सुख फीका-फीका लगता है, झूठे संसार का ।।
जो लगन लगी है तुमसे, मुझे रोज तड़फाये,
दीदार तेरा ना हो तो, मुझे चैन ना आये,
ऐसा है रोग पुराना, दिल-ए-बेकरार का ।
सुख फीका-फीका लगता है, झूठे संसार का ।।
दाता दयालु तुमसा, मिलता है कहाँ पे,
खुशियों से भरती झोली, बिन मांगे यहाँ पे,
ऐसा है करिश्मा दाता, तेरे दरबार का ।
सुख फीका-फीका लगता है, झूठे संसार का ।।
जिसकी हिफाज़त तूं करे, जब बन के रखवाला,
पैदा हुआ ना कोई, उसे मारने वाला,
फिर डर उसका क्या होगा, यम की कटार का ।
सुख फीका-फीका लगता है, झूठे संसार का ।।
तूं रख ले मुझको चाहे, जैसे भी हाल में,
मुझके फंसा मत देना, माया के जाल में,
बस ‘गजेसिंह’ को दिखला, रस्ता उद्धार का ।
सुख फीका-फीका लगता है, झूठे संसार का ।।
श्री गजेसिंह तँवर द्वारा ‘अफसाना लिख रही हूँ, दिल-ए-बेकरार का’ गीत की तर्ज़ पर रचित भावपूर्ण रचना ।
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