तु क्यों घबराता है तेरा श्याम से नाता है (Tu Kyu Ghabrata Hai Tera Shyam Se Nata Hai)

Tu Kyu Ghabrata Hai Tera Shyam Se Nata Hai Jab Malik Hai Sir Pe Kyu Ji Ko Jalata Hai
तु क्यों घबराता है तेरा श्याम से नाता है जब मालिक है सिर पे क्यों जी को जलाता है

 

तु क्यों घबराता है, तेरा श्याम से नाता है,
जब मालिक है सिर पे, क्यों जी को जलाता है।।

 

तुं देख विनय करके,तेरी लाज बचायेगा,
तुं जब भी बुलायेगा,हर बार ये आयेगा,
अपने प्रेमी को दुखी,ये देख न पाता है।।(१)

 

जब कुछ ना दिखाई दे,तुं श्याम का ध्यान लगा,
मेरा श्याम सहारा है,मन मे विश्वास जगा,
जब श्याम कृपा होती,रस्ता मिल जाता है।।(२)

 

तेरी हर मुश्किल को,चुटकी मे ये हल कर दे,
कोई दांव चलाये तो,ये झट से विफल कर दे,
कोई ना जान सके,किस रूप मे आता है।।(३)

 

पड़ती जरुरत जब है,ये आता तब तब है,
“बिन्नू” का ये अनुभव है,यहाँ सब कुछ सम्भव है,
मेरे श्याम की लीला को,कोई समझ ना पाता है।।(४)

 

जब मालिक है सिर पे,क्यों जी को जलाता है

 

।। श्री श्याम आशीर्वाद ।।
।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम ही जीवन प्राण ।।
।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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