इंसाफ का दर है तेरा यही सोच के आता हूँ हर बार तेरे दर से क्यों खाली ही जाता हूँ (Insaf Ka Dar Hai Tera Yahi Soch Ke Aata Hu Har Bar Tere Dar Se Khali Kyu Jata)
खाली , जाने से , प्रभु -2… दिल में , शरमाता हूँ ।।
हैराँ हूँ , प्रभु तुमने … दुखियों को , लौटाया है
फिर , किसके लिये , तुमने … दरबार , लगाया है
बनवारी , महिमा , तेरी -2.. कुछ , समझ ना , पाता हूँ ।।
।। श्री श्याम आशीर्वाद ।। ।। श्याम श्याम तो मैं रटू , श्याम ही जीवन प्राण ।। ।। श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम ।।
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